दीपू चंद्र दास (या Dipu Chandra Das) एक २५-२७ साल के बांग्लादेशी हिंदू युवक थे, जो मामनसिंह ज़िले के भालुका इलाके में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे।
❗ क्या हुआ था — मुख्य घटना
18 दिसंबर 2025 को भीड़ ने दीपू दास पर ईशनिंदा (धर्म अपमान) का आरोप लगाया और उन्हें बेरहमी से पीटा।
पुलिस और अधिकारियों के अनुसार कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने सच में कोई अपमानजनक बात कही थी।
बाद में भीड़ ने उन्हें मार डाला, लटकाया और शव को आग लगा दी — यह एक मॉब लिंचिंग की तरह हुआ।
⚖️ सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
✔️ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने घटना की निंदा की और कहा कि यह “क्रूर अपराध है ।
✔️ सरकार ने बताया कि वो दीपू के परिवार (पत्नी, बच्चे और माता-पिता) का आर्थिक और सामाजिक समर्थन करेगी।
✔️ लगभग 12 लोग गिरफ्तार किए गए हैं और मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा ताकि दोषियों को जल्दी सजा मिले।
✔️ सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी जांच और न्याय दिलाने की कोशिश कर रही हैं।
🇮🇳 भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
📌 भारत में भी इसका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विरोध देखा जा रहा है:
दिल्ली और कोलकाता में प्रदर्शन हुए, कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं
भारत-बांग्लादेश के राजनयिक स्तर पर भी बातचीत हुई — दोनों देशों के दूतों को बुलाया गया।
लोग सोशल मीडिया पर और सार्वजनिक जगहों पर न्याय की मांग उठा रहे हैं।
⚠️ सोशल मीडिया पर गलत दावे
बहुत से वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जाता है कि पुलिस ने दीपू को भीड़ के हवाले कर दिया — लेकिन उनमें से कई वीडियो पुराने/गलत हैं और उनका केस से कोई लेना-देना नहीं पाया गया है।
📌 संक्षेप में — क्या बड़ा मुद्दा है?
दीपू दास एक हिंदू युवक थे जिनकी भीड़ ने बिना सच्ची जानकारी के हत्या कर दी।
मामला धर्म विरोधी आरोप से शुरू हुआ लेकिन पुलिस ने कहा कि आरोप के कोई सबूत नहीं हैं।
सरकार और पुलिस जांच कर रहे हैं, कई गिरफ्तारियां हुई हैं और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के फैसले की बात कही जा रही है।
भारत में भी यह मुद्दा बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध और राजनयिक चर्चा का विषय बन गया है।